आस्थागाज़ियाबाद

महाराजपुर प्राइमरी हेल्थ सेंटर की प्रभारी चिकित्साधिकारी ऋतु वर्मा ने जीवनदान शीर्षक पर लिखी कविता

4th पिलर,गाजियाबाद
मैं कब कहती हूं तुमसे कि,स्वर्ण दान मुझे दे दो ।
इतनी बड़ी दुनिया में, थोड़ा सा स्थान मुझे दे दो ।।
अरे! इतने बड़े खजाने का,तू तो है मालिक ।
दो ही अक्षर का तो है,’मान’मुझे दे दो ।।
मैं भी जानती हूं करना,खगोलीय गणनाओं को ।
मेरे हिस्से का छोटा सा, आसमान मुझे दे दो ।।
अपनी कर लूं हिफाजत, बस इतना हो जाए ।
आंखों में चिंगारी,मुठ्ठी में तूफान मुझे दे दो ।।
दूषित दृष्टि को दूर से ही, परखने की क्षमता हो ।
ऐसी दुर्लभ दूरदृष्टी का, वरदान मुझे दे दो ।।
जो है जिस परिस्थिति में, वो प्रसन्न चित्त है वैसे ।
और जैसी मैं हूं वैसा ही, सम्मान मुझे दे दो ।।
मुझे दर्द से उबरना,  खुद कुदरत सिखाती है।
जो तुमसे ना उठाए जाए, भारी सामान मुझे दे दो ।।
कांधे पे धर ले जाती हूं, तेरे घर से प्रेम पोटली ।
मैं न कहती बाबा, अपना मकान दुकान मुझे दे दो ।।
नन्ही नन्ही सी मुस्कानें, पनपकर हंसना चाहती हैं ।
तुम कहते हो अपने, जिस्म ओ जान मुझे दे दो।।
जी मैं भी तो देखूं, धरती कितनी खूबसूरत है ।
आने दो ना दुनिया में,जीवनदान मुझे दे दो।।

(स्वरचित कविता- चिकित्सक ऋतु वर्मा)

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