महाराष्ट्रराष्ट्रीय

श्मशान घाट पर टोकन प्रक्रिया से दाह संस्कार होने पर लोगों की लगी लंबी कतार, एक एंबुलेंस से 22 शव पहुंचे श्मशान घाट तो मुंबई हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

4th पिलर न्यूज,मुंबई
कोरोना महामारी से महाराष्ट्र में हालत बेकाबू हैं। श्मशान घाट में शव रखने के लिए जगह नहीं है और लोगों को दाह संस्कार के लिए वेटिंग करनी पड़ रही है। मुंबई हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 से जान गंवाने वालों के शव घंटों तक नहीं रखे जा सकते और इसके साथ उसने महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी से राज्य व मुंबई में श्मशानों की स्थिति के बारे में अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि कई श्मशानों में शव के अंतिम संस्कार के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है और पीड़ितों के रिश्तेदारों को श्मशान के बाहर कतार में लगे रहना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और अन्य नगर निकायों को इस मुद्दे के समाधान के लिए कुछ ठोस व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। घंटों तक शव नहीं रखे जा सकते.’’अदालत ने कहा कि अगर श्मशान में कतार लगी हुई है तो अस्पतालों से शव नहीं छोड़े जाने चाहिए। न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने महाराष्ट्र के बीड जिले की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जहां कोविड-19 संक्रमण के शिकार 22 लोगों के शव को एक ही एंबुलेंस से श्मशान में पहुंचाया गया। अदालत कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी, ऑक्सीजन की आपूर्ति, बेड की किल्लत और अन्य मुद्दों के संबंध में निर्देश देने का अनुरोध किया गया। वहीं, एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सिमिल पुरोहित ने अदालत से कहा कि श्मशानों में दाह संस्कार करने के लिए टोकन प्रक्रिया लागू है। अदालत ने केंद्र सरकार को भी महाराष्ट्र को रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति और आवंटन पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार अवगत कराए कि रेमडेसिविर का कितना आवंटन हुआ। कोविड-19 के मामलों के हिसाब से महाराष्ट्र शीर्ष पर है। पीठ ने उस घटना पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा है जिसमें भाजपा के सांसद सुजय विखे पाटिल ने दिल्ली से रेमडेसिविर की शीशियां मंगायी और महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में इनका वितरण किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close