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डॉ अंशु जैन ने कहा देश में कोरोना की त्रासदी बेहद गंभीर व भयावह, कोरोना से बचाव के लिए फेस मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग में लापरवाही हो सकती है खतरनाक

4th पिलर न्यूज,गाजियाबाद
अंग्रेजी की यह कहावत spare the rod spoil the child अर्थात ‘अगर बच्चों पर कड़ाई नहीं की जाए तो वह बिगड़ जाते हैं’, आज कोविड संबंधित समस्या जिससे कि देश पिछले एक साल से अधिक समय से लड़ रहा है उस पर सटीक रूप से लागू होती है। परिणाम स्वरूप हम महाराष्ट्र में कोरोना का तांडव और संपूर्ण देश में कोरोना की दूसरी लहर जो कि बहुत विकराल हो सकती है उस की कगार पर खड़े हुए हैं और इसमें कोई आश्चर्य या नई बात नहीं है क्योंकि ऐसा तो होना ही था। दरअसल, 30 जनवरी 2020 को केरल में पहले मामले का पता लगने से लेकर कुल 11.5 मिलियन मामलों और लगभग 1 लाख 62 हजार लोगों की मृत्यु होने तक दुनिया में कोरोना मामलों में दूसरे पायदान पर रहने तक भारत को इस दौरान अत्यधिक अशांति और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसने कि इस कोरोना महामारी की वजह से वर्ष 2020 को न कोसा हो, क्योंकि हर किसी इंसान को कोरोना महामारी की इस अवधि के दौरान किसी न किसी रूप में संकटों और आंसुओं का अनुभव करना पड़ा है। शायद किसी ने कभी सोचा भी न होगा कि ‘महामारी’ शब्द जिसके बारे में वह अभी तक इतिहास या जनरल नॉलेज की पुस्तकों में पढ़ते आए थे, वह शब्द उनके जीवन का एक घातक और अभिन्न अंग बन जाएगा,जिस से निजात पाना इतना मुश्किल, असहनीय और अनिश्चित होगा।
कोरोना की त्रासदी अत्यंत भयानक, दयनीय और गंभीर
हमारा देश गवाह है उन प्रवासी मजदूरों के अपार दुख का जिन्होंने अपनी पीठ पर छोटे-छोटे बच्चों को लाद कर और गर्भवती महिलाओं के साथ भूखे पेट रेलवे की पटरियों. के सहारे चलकर हजारों किलोमीटर की यात्रा नंगे पैर की , इसी आशा में कि जल्द से जल्द वे अपने गंतव्य पर पहुंच जाएंगे। परंतु उनमें से कईयों को तो घर पहुंचने के पहले ही रेलवे ट्रैक पर सोती हालत में ट्रेनों के द्वारा रौंद दिया गया। उन युवाओं की व्यथा का जो अपने परिवारों का एकमात्र सहारा और रोटी कमाने वाले थे परंतु उनका जॉब छीन लिया गया। सफेद रंग के लिबास में देव दूतों के अथक परिश्रम का और कोरोनावरियर्स का जो कि पिछले 1 साल से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह गवाह है देश के भविष्य उन नौनिहालों का जिन्होंने अपना बचपन घर की चार दीवारी में पूरे 1 साल से अधिक समय तक बंद रहकर बिना स्कूल जाए ही बिता दिया और जिनमें से अधिकांश की आंखों पर चश्मा चढ गया है है और जो अक्सर आंखों में लालिमा ,खुजली, आंखों की पीड़ा के बारे में शिकायत करते रहते हैं।
कोरोना को लेकर कई श्रेणियों में मिल रही लापरवाही
कोरोना को लेकर लोगों की भी कई श्रेणियां देखी जा सकती हैं बहुत सारे लोग शुरू से ही लापरवाह रहे हैं। उन्होंने ना तो मास्क पहनने की कभी परवाह की है और ना ही सामाजिक दूरी बनाए रखने की और ना ही भीड़ से बचने या अनावश्यक यात्रा से बचने का कोई प्रयास किया। कुछ अन्य लोगों में आत्म संयम की कमी है। वह दोस्तों और रिश्तेदारो से मिलना जुलना ,पार्टियों, समारोहो, धार्मिक आयोजनों, जिम, डिस्को क्लब,बार , ट्रेड फेयर, मॉल आदि में मौज मस्ती और मेल मिलाप करना नहीं छोड़ा। वहीं, बच्चों का अनियंत्रित ढंग से घूमना और खेलकूद करवाना नहीं छोड़ सकते चाहे कुछ भी हो जाए केवल मौज मस्ती या टाइमपास के लिए और वह भी बिना किसी सावधानी के, जिसका परिणाम कुछ भी और कितना भी भयावह हो सकता है। कुछ अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति कितनी भी कठिन स्थितियों में धार्मिक जगह पर जाना नहीं छोड़ सकते । उन्हें लगता है कि केवल मंदिर में ही भगवान है चाहे वहां जाकर उनके साथ कोई वायरस ही क्यों ना आ जाए या उनकी वजह से किसी दूसरे का जीवन ही खतरे में क्यों ना पड़ जाए। शिक्षित लोग भी जिन्हें दूसरों को कोविड अनुकूल व्यवहार करने के बारे में जागरूक और सतर्क करना चाहिए वह भी अनपढ़ और अशिक्षित लोगों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
जेब में रखकर घूमते हैं मास्क व बाजारों में भीड़ बरकरार
कुछ लोग मास्क को अपनी जेब में रखकर घूमते हैं जिससे कि वह कभी अप्रत्याशित चालान से बच सकें उनमें से कई लोग मास्क को अपनी ठोड़ी पर लगाए रहते हैं तो कुछ अपने गले में डाल कर घूमते हैं। बाजारो में पहले की ही तरह भीड़ भाड़ होने लगी है। सोशल डिस्टेंसिंग जैसी कोई चीज नहीं है। बस और ट्रेन भरकर चल रही है पार्कों में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के समूह बिना मास्क के देखे जा सकते हैं । बच्चों के झुंड के झुंड बिना मास्क के खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। होली मिलन सम्मेलनों , धार्मिक समारोहो और अन्य आयोजनों के आयोजन में भी भीड़ भाड़ इकट्ठे होने में कोई कमी नहीं है। लोगों को कोरोना संक्रमण की फैल रही महामारी को लेकर जागरूक रहने की जरूरत है। तभी देश ऐसे मुश्किल हालात का सामना कर सकता है जब सभी लोग इसमें सहयोग करें।

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