गाज़ियाबाद

पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ की 90 वीं गोष्ठी

गाजियाबाद।  वैशाली सेक्टर-4 स्थित सेंट्रल पार्क में पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ की 90 वीं गोष्ठी हुई । इसमें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत साहित्यकारों का सम्मान किया गया । जिसके अंतर्गत पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ के सहभागी पुरस्कृत कवि लेखक में साहित्य भूषण प्राप्त कवि बनवारी लाल गौड़ एवं कवि शिवानंद सहयोगी तथा पुस्तकों के लिए पुरस्कृत कवि विष्णु सक्सेना एवं डॉ ईश्वर सिंह तेवतिया को सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित और विख्यात साहित्यकार बी के वर्मा शैदी पधारे एवं अध्यक्षता आलोचक कवि डॉ बरुन कुमार तिवारी ने की, मंच संचालन संयोजक कवि अवधेश सिंह ने किया । विशिष्ट अतिथि के रूप में स्थानीय पार्षद नीलम भारद्वाज भी शामिल हुई हैं । राष्ट्रीय विषयों के साथ सामाजिक सरोकार से जुड़े गीत गजल कविताओं का पाठ किया गया । चिर परचित अंदाज में सम्पन्न यह गोष्ठी देर शाम तक पार्क में चलती रही । साहित्य भूषण नवगीतकार शिवानंद सहयोगी ने “एक पीपल का फिर कल निधन हो गया शीर्षक का गीत पढ़ा। वरिष्ठ साहित्यकार शैदी जी ने अपने काव्य पाठ में दोहे और मुक्तक पढे समापन एक मुकम्मल गज़ल के साथ किया। डॉ ईश्वर सिंह तेवतिया ने उलझन शीर्षक से आज पर चोट करती कविता पढ़ी – “समझ नहीं आता क्या /  लिक्खूँ क्या छोड़ूँ मैं /  किसके साथ रहूँ / किससे नाता जोड़ूँ मैं। मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि अवधेश सिंह ने कविता शीर्षक “मन की बात” के साथ सामयिक दोहे पढे । आज के कठिन समय में सकारात्मक होने की गज़ल भी पढ़ी “ये दिल हो जब उदास अमाँ मुस्कुराइए / ग़म हो जो आसपास अमाँ मुस्कुराइए । शाखों से सूखते हुए पत्तों ने है कहा / बदलेगा ये लिबास अमाँ मुस्कुराइए। इस मौके पर अनीता सिंह , सनी दयाल, रघुवर दयाल, शोभा चौधरी तथा डी एन भाटिया आदि मौजूद रहे।

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