गाज़ियाबाद

विश्व हिंदू परिषद के गोरक्षा विभाग का राष्ट्रीय अधिवेशन

गौ माता की रक्षा का लिया संकल्प

गाजियाबाद। आरके जीआईटी एम में विश्व हिंदू परिषद के गोरक्षा विभाग का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। अधिवेशन को संबोधित करते हुए विहिप के कार्याध्यक्ष मा. आलोक कुमार ने कहा कि मेरे मन पर  7 नवम्बर, 1966 के गोरक्षा आंदोलन के दौरान संसद मार्ग, नई दिल्ली में साधु-संतों-गोरक्षकों पर की गई फायरिंग का भयावह दृष्य अभी तक अंकित है, उस समय मैं काफी छोटा था। उन्होंने बताया कि उस गोली कांड में सैकड़ों साधु-संतों-गोरक्षकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इससे पूर्व भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के लिए पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था और लगभग दो करोड़ लोगों का हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपा गया था। और अभी भी कई दशकों से गोरक्षा हेतु हजारों लोगों द्वारा पूरे देश में प्रयास किया जा रहा है। इसी प्रकार देश के अनेक राज्यों में गोमाता-गोवंश के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए राज्य सराकारों द्वारा अलग-अलग ढंग से कोशिश की जा रही है। इन राज्यों में हजारों एकड़ भूमि पर गोवंश आधारित खेती प्रारम्भ कर दी गई है। उन्होंने कहा वास्तव में गाय को पालने वाला गोपालक ही‘‘गोपाल’’ है। कार्यक्रम के प्रारम्भ में गोरक्षा विभाग के राष्ट्रीय संगठन मंत्री खेमचन्द ने कहा कि गाय श्रद्धा का विषय है, इसलिए श्रद्धाभाव होना अति आवश्यक है। बावजूद इसके आज समाज के सामने गाय का आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व सामने लाना होगा। गाय-गोवंश की रक्षा के लिए लोगों की सोच को बदलना होगा। इन सब कार्यों के लिए कार्यकर्ताओं की टीम ही मुख्य आधार है। संगठन की टीम की शक्ति के माध्यम से हम सरकार को सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं। गत आजादी के अमृत महोत्सव पर प्रधानमंत्री को भी विवश होकर लाल किले की प्राचीर से रसायनमुक्त खेती के लिए बोलना पड़ा। खेमचन्द ने कहा – महान राजनीतिज्ञ चाणक्य का कहना है कि मनुष्य भले ही बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्त कर ले, ऊंचे-से-ऊंचे स्थान पर पहुंच जाए, लेकिन यदि वह निष्क्रिय हो जाए तो वह नीचे आ जाएगा। इसीलिए गोमाता-गोवंश के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए हम सबको हमेशा सक्रिय रहना होगा। उन्होंने कहा, हमारा उददेश्य है- घर-घर गाय,  गांव-गांव गौशाला, यही है हमारी निरोगशाला। विहिप के सयुक्त महामंत्री स्थाणुमलयन ने कहा कि गोरक्षा का अर्थ है- धर्म की रक्षा। इसलिए धर्म की स्थापना के लिए हम गोरक्षा-कार्य से शुरु करें। गोरक्षा विभाग के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री दिनेश चन्द उपाध्याय ने कहा – बिना संगठन के कोई भी संस्था अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकती। इसलिए हमें संगठन को नीचे तक मजबूत बनाना पड़ेगा। संगठन के बल पर सभी समस्याओं का समाधान संभव है। राजेन्द्र प्रसाद सिंघल ने कहा कि गोपालन और गोरक्षा के लिए लोगों की धारणा को बदलना होगा। डॉ. प्रज्ञान त्रिपाठी ने पंचगव्य-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने डायबिटीज, किडनी की पथरी, अनिद्रा, पेट की बीमारियों आदि को समाप्त करने का समाधान बतलाया। राष्ट्रीय गोरक्षा आंदोलन समिति के राष्ट्रीय सह संयोजक शशांकधर शेखर ने गोवंश हत्या एवं गोतस्करी को कानून के माध्यम से रोकने के संदर्भ में विस्तार पूर्वक समझाया। भारतीय गोवंश रक्षण सवंर्द्धन परिशद के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय गुरु प्रसाद सिंह ने कहा कि भारत की गाय पूरे विश्व में चिंतन का विषय बन गई है। विहिप के केन्द्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचन्द सावला ने कहा कि गाय को भी जीने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने एक भिखारी, लोमड़ी और शेर की कहानी सुनाते हुए कहा कि अभी तक हम लोमड़ी बनकर जी रहे थे, अब हमें शेर बनकर जीना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस दिन हिन्दू उठ खड़ा होगा, जाग्रत हो जाएगा उस दिन कोई भी समस्या नहीं रहेगी। इस मौके पर पवन त्यागी, राजीव गुप्ता, नितिन त्यागी, स्वयंसेवक मनमोहन गोयल, खेमचंद शर्मा, उपेंद्र गोयल, पवन त्यागी, नितिन त्यागी, राजकुमार त्यागी, योगेश कौशिक, राजीव गुप्ता, अश्वनी मित्तल, जितेन्द्र शर्मा आदि मौजूद रहे।

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