गाज़ियाबाद

हमारा भारत तो स्वतंत्र हो गया, पर हम आज तक भी स्वतंत्र नहीं हो सके: दीपिका दीक्षित नागर

4th पिलर न्यूज,गाजियाबाद
स्वतंत्रता एक ऐसा शब्द है, जिसके एहसास से ही हमारे अंतर्मन में ही खुशी का आभास होने लगता है। मन अपने सपनों की उड़ान भरने लगता है। हां हम स्वतंत्र देश में ही रहते हैं, सबको अपने विचार प्रकट करने का, कुछ भी दर्शाने का, कहीं भी आने-जाने की पूरी स्वतंत्रता है। पर जैसे हमें अपने चारों तरफ दिखाई दे रहा है क्या वह सत्य है। क्या हम और हमारा समाज पूरी तरह से स्वतंत्र और सुरक्षित है। अगर सही मायने में देखा जाए तो सत्य यह है कि हम पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं हैं। जी, हां यह बात कुछ कटु जरूर है, लेकिन बिल्कुल सत्य है। इतने अर्से बाद भी हम आजाद नहीं हो सके। चाहे हम किसी भी शहर व गांव में चले जाए, लेकिन पूरी तरह से आजादी आज भी नजर नहीं आएगी। अब आप सोच रहे हैं कि ऐसा क्यों कहा है। जब हम आज भी दिल्ली के निर्भया कांड को याद करते हैं तो रूह कांप उठती है। या फिर हरियाणा जैसे राज्य की खाप पंचायतों के फैसले। जिनमें महिलाओं पर तमाम तरह की पाबंदी लगा दी जाती हैं। आज भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है और सरेराह युवतियों को छेड़ा जाता है। महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं। इन सबको देखकर लगता है कि क्या हम आजाद हैं और हमारे समाज में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। दहेज और अन्य कारणों से महिलाओं पर अत्याचार जारी है। कई बार महिलाओं को मजबूरन आत्महत्या करनी पड़ती है। देशभर में जगह-जगह उन्मादी भीड़ लड़ाई झगड़ों और दंगे-फसाद करते हैं। अगर सही मायने में देखा जाए तो आजादी का अर्थ सिर्फ इतना है कि इंसान अपनी मर्यादा में रहकर नैतिक कार्य कर सके। हमारी बहन-बेटी व बहुएं खुली हवा में सांस ले सके और अपने सपनों की उड़ान भर सके। चारों तरफ शांति व भाईचारे का माहौल तो तभी हम गर्व से कह सकेंगे कि हम पूरी तरह से स्वतंत्रत हैं।

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