टेक्नोलोजी

फर्जी ऐप की अब खैर नहीं डिजिटली उधार देने वाले प्लेटफॉर्म की जांच करेगा आरबीआई

4th पिलर न्यूज,नई दिल्ली। हाल के कुछ दिनों में देखा जा रहा है कि ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम में कई ऐसे ऐप या प्लेटफार्म बने हैं जो लोगों को ऋण उपलब्ध कराते हैं। साथ ही कई सारे लोगों और उपभोक्ताओं में डिजिटल माध्यम से ऋण लेने का चलन भी पिछले कुछ दिनों बढ़ता हुआ देखा गया है। लेकिन कई बार लोग गलत जानकारी और फर्जी तरीके से बनाए गए ऐप की वजह से ऑनलाइन ठगी का शिकार भी हो जाते हैं। इन परेशानियों के मद्देनजर डिजिटल तरीके से ऋण उपलब्ध कराने की संभावनाओं और दायरे का अध्ययन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के द्वारा एक कार्यकारी समूह का गठन किया गया था, और यह समूह अगस्त के अंत तक इस मामले में RBI को अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया है कि “डिजिटल ऋण पर समिति की रिपोर्ट अपने अंतिम चरण में है। समिति को परामर्श प्रक्रिया के लिए और अधिक समय चाहिए था, जिस कारण से रिपोर्ट को सबमिट करने में अतिरिक्त समय लगा है। रिपोर्ट को अगस्त महीने के आखिर में प्रस्तुत किया जा सकता है। रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद आरबीआई के द्वारा रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा और जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा”। ऑनलाइन माध्यम और मोबाइल ऐप के जरिए ऋण देने वाले प्लेटफार्म के अलावा डिजिटल ऋण का अध्ययन करने के लिए आरबीआई ने जनवरी में कार्य समूह का गठन किया था। इस कार्यकारी समिति का अध्यक्ष आरबीआई के कार्यकारी निदेशक जयंत कुमार दास को बनाया गया है। इनके अलावा समति में आरबीआई पर्यवेक्षण विभाग के मुख्य महाप्रबंधक अजय कुमार चौधरी, आरबीआई भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग के मुख्य महाप्रबंधक पी. वासुदेवन और अन्य सदस्य भी शामिल हैं। इस समिति को डिजिटली तौर पर ऋण का मूल्यांकन, आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं में आउटसोर्स के द्वारा डिजिटल ऋण गतिविधियों की पैठ और मानकों का आंकलन, वित्तीय स्थिरता, विनियमित संस्थाओं और उभोक्ताओं के लिए अनियमित डिजिटल ऋण के जोखिमों की पहचान के लिए गठित किया गया है।

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