उत्तरप्रदेशगाज़ियाबाद

मर्यादित राजनीति करने वाले नेता हैं रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया: दिव्य अग्रवाल

4th पिलर न्यूज,गाजियाबाद
भारतीय राजनीति में आज भी कुछ चेहरे ऐसे है जो डिजिटल राजनीति में नही अपितु धरातल पर जनता के सुख दुख के साथी है उनमें से ही एक चेहरा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पिछले 30 वर्षो से कुंडा प्रातपगढ़ से लगातार निर्दलीय रूप से जीतते आ रहे विधायक श्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का है। ऐसे व्यक्तित्व जो जिन लोगो के भी संपर्क में आते है उन्हें अपना बना लेते हैं । आज भारतीय राजनीति में जहां आरोप प्रत्यारोप ,लांछन लगाना,कमजोरियों को भुनाने, जातिगत भावनाओ का लाभ लेने की कला बड़े बड़े राजनेताओं में है एवम मध्यम वर्ग व मजदूर वर्ग की याद केवल चुनावो में ही उन बड़े राजनेताओं व पार्टियों को आती हैं। इसके विपरीत राजा भैया की गिनती उन जनप्रतिनिधियों में अवश्य होनी चाहिए जो आज राजनीति के आधुनिकीरण होने के बाद भी लोगो की निजी समस्या तक पहुंचकर उन्हें सुलझाने का प्रयास करते हैं। राजा भैया 1993 से विधायक है एवम पांच मुख्यमंत्रियों के साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं । परन्तु कभी किसी नेता के बारे में अपशब्द नही कहे एवम देश व जनता के हित मे किसी भी पार्टी ने जो भी काम किया हो उस काम को भी राजा भैया ने खुले दिल से सराहा व स्वीकारा है । यही कारण है राजा भैया जैसे राजनेताओं को लोग आज भी रियासते खत्म होने के बावजूद एक राजा के रूप में स्वीकारते हैं । इसके साथ साथ अपने नाम रघुराज के अनुरूप ही शास्त्रों का ज्ञान भी इतना कि धर्म ग्रंथ ज्ञाताओं के साथ शास्त्रार्थ करने की भी पूर्ण योग्यता राजा भैया में है। इसका मूलभूत कारण यह भी है कि रघुराज सिंह जी के पिता जी उदय प्रताप सिंह जी की गहरी आस्था सनातन संस्कृति में है जिस कारण पूर्व में वे विश्व हिंदू परिषद व राष्ट्रीय स्वम् सेवक संघ से जुड़े रहे एवम इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए एवम सनातन संस्कृति की सेवा के लिए सैदव संकल्पित रहे । राजा भैया बिना सरकार में रहते हुए भी प्रतिदिन जनसमस्याओं की 700 -800 आवेदनों का निस्तारण अपने महल बेंती से ही करते है जिनमे घरेलू कलह,बच्चो की पढ़ाई,पेयजल,खेतो आदि की वो निजी समस्याएं है जो निम्न व मध्यम वर्ग के दैनिक जीवन से जुड़ी हुई हैं। आवेदक आम हो ख़ास भाषा की मर्यादा का स्तर कभी रघुराज प्रताप सिंह जी ने नही गिराया । इसी कारण जनसमर्थन की ताकत पर राजा भैया ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का निर्माण किया ।श्री राम चरित्र मानस को अपनी आत्मा में उतारने वाले राजा भैया की लोकप्रियता अब केवल पूर्वांचल तक ही नही अपितु पश्चिम में भी धीमे धीमे बढ़ने लगी है।

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